पिछला रात हम नीमन से सुत ना पइनी. अंघीए ना लागल. घर से लेके दफ्तर तक के टेंशन हमरा नींद में बाधा उत्पन्न क देले रहे. रात में जब हमरा नींद ना आवत रहे तब हम ई सोचत रहीं कि ऊ दिन केतना नीमन रहे, जब चांद के अंजोरिया में माईं चांद के ओर आपन हाथ डोलावत हमरा के सुतावे खातिर एगो लोरी सुनावत रहे. ऊ लोरी हमरा आजुओ ओही तरह इयाद बा.. माई कहत रहे...
आऊ रे नींदिया नींदरवन से, बाबू आवेला मामा किहां से, नानी पूछलस बतिया आइल हमार नतिया...
जब हम ना सुती त माई के लगे एगो अउर नुख्सा रहे. तब ऊ हमार पीठ थपथपावत ई कहत रहे कि, सन चिरइया सन चिरइया पपरा पकाव, तोरा पपरा में आग लागल दमकल बोलाव, दमकल के छुरी टूटल डॉक्टर बोलाव, डॉक्टर के सूई टूटल थपरी बजाव. एकरा बाद हम जोर-जोर से हंसे लागत रहीं. आ हंसत-हंसत लोट-पोट हो जात रहीं अउर हंसत-हंसत एतना थक जात रहीं कि नींदिया के आगोस में समा जात रहीं. धीरे-धीरे हम बड़ होत गइनी आ माई के दुलार से दूर होत गइनी.
पढ़े आ कमाए खातिर लखनऊ होत दिल्ली तक पहुंच गइनी.
दिल्ली में अइला के बाद एगो अलगे दुनिया देखे के मिलल. झूठ आ फरेब के दुनिया. स्वार्थ के दुनिया. सात-आठ साल के आपन प्रवास के दौरान जब हम दिल्ली आ आपन भोजपुरिया समाज के संस्कार आ संस्कृति के आमने-सामने रख के तुलना करे बइठे नी त मन बेचैन हो जाला. हमरा ई ना बुझाला कि आखिर दिल्ली में राखल का बा? काहे हमनी के मुंह उठा के दिल्ली के ओर भाग रहल बानी जा. ई ठीक बा कि दिल्ली के देश के राजधानी हिय आ एकरा प हरेक हिंदुस्तानी के समान रूप से अधिकार बा. बाकिर जब हम ई देखेनी कि दिल्ली के संस्कार हमनी के संस्कार के खतम क रहल बा त बड़ा दुख होखेला. दिल्ली के कहे खातिर त दिल वालन के शहर कह जाला बाकिर दिल्ली के सच्चाई ई बा कि एकरा लगे दिल छोड़ के सब कुछ बा.
हम आपन पिछला आलेख "दिल्ली नीयन रउओ बढ़ाई भोजपुरी के शान" के अंतर्गत एहिजा बसल भोजपुरिया लोगन के सराहना कइले रहीं. काहे कि एह लोगन में अबहियों आपन माटी के प्रति लगाव बा. आ भोजपुरी के सम्मान दिलावे खातिर आजुओ ऊ लोग संघर्ष क रहल बा. बाकिर आज हम दिल्ली(कथित अमीर लोग) के बात क रहल बानी. तनि चिंता हमरा आपन भोजपुरी भाइयनो के लेके बा. काहे कि आज उहो दिल्ली वालन के राह प चले के चाहत बाड़न. अउर उनकर इहे चाहत उनका से उनकर संस्कार के हरण क रहल बा. ऊ गांव से दूर हो रहल बाड़न. माई के दुलार से दूर हो रहल बाड़न. बाबूजी के आशीर्वाद से दूर हो रहल बाड़न. जवना के नतीजा ई भइल बा कि लोरी सुना-सुना के बाबू के सुतावे वाली माई के आंख में लोर बा. अउर ओह लोर के पोंछे वाला केहू नइखे. अइसन नइखे आपन माई आ माटी के भुलाए वाला लोग बहुत खुश बा. उनकरो स्थिति बहुत दयनीय बा. ओकर स्थिति दीवार फिलिम के अमिताभ बच्चन जइसन बा जवना में अमिताभ के लगे गाड़ी बा बंग्ला बा, सबकुछ बा बाकिर माई के दुलार आ प्यार नइखे. बाकिर शशि कपूर के लगे दुनिया के सबसे बड़ दौलत माई के प्यार आ दुलार बा.
हम त आपन भाई लोगन से इहे कहे के चाहत बानी की रउआ लोग चाहे मुंबई, चेन्नई, कोलकात्ता, दिल्ली चाहे दुनिया के कवनो कोना में रहीं बाकिर आपन भोजपुरिया मिठास के बनवले रहीं. ओकरा में माहुर मत घोलीं. ना त एक दिन अइसन आई जब राउर लइका-पतोह रउए के हिंदी फिलिम 'अमृत' के राजेश खन्ना(अमृत शर्मा) आ कमला सक्सेना नीयन घर से निकाल के फेक दीहन स.
खाशतौर से हम मेट्रो शहरन में रहे वालन भोजपुरिया नवजवानन से ई निहोरा करे के चाहत बानी कि रउआ सभे कुछो करे के पहिले आपन माई-बाबू आ आपन जनम भूमि के जरूर इयाद क लेब. अउर जब नींद ना आवे त दादा-दादी, नाना-नानी आ माई -बाबूजी के लोरी के जरूर इयाद क लीह लोग. शायद तोहार बेचैन मन के शांति मिल जाव.
जात-जात वरिष्ट भोजपुरी लेखक प.कामता नाथ दूबे के श्रंद्धांजलि. उहां के पिछला 11 जून के 81 साल के उमिर स्वर्गवास हो गइल. उहां के गोपालगंज जिला के भरकुइया बरौली गांव के रहे वाला रहीं. उहां के भोजपुरी आ हिंदी में कई गो नाटक आ कहानी लिखले रहनी. 1998 में नेहिया लगवनी सइया से फिलिम के उहां के प्रोड्यूसरो रहीं. भगवान उहां के आत्मा के शांति देस.
ठीक बा त अब हम चलत बानी. अगिला हफ्ता फेर आइब एगो नया बात के संगे.
राउर
आशुतोष कुमार सिंह
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