शुक्रवार, 20 अगस्त 2010
भोजपुरिया लोगन के कुछ लोग गुमराह क रहल बा...
कुछ दिन पहिले हम 'इंटरनेटिया लोगन के मिलन आ अंजोरिया के अंजोर'
शीर्षक से एगो आलेख बिहारी खबर में लिखलें रहीं. जवना आलेख प भोजपुरी के खेवनहार कहे वाला लोगन के एतराज भइल रहे. ऊ लोग धमकी भरल एसएमएस भेज के हमार लेखनी के रोके के प्रयासो कइलस. अइसन लोगन प हमरा तरस आ रहल बा, जे भोजपुरी के नाम प आपन दुकान चलावे खातिर बिना सोंचले समझले केहूं के कुछु कह दीहल आपन जीत समझ रहल बाड़े. एह लोगन के समझे के चाहीं की झूठ हमेशा से झूठ होखेला. हम भोजपुरी के पाठकन खातिर ऊ आलेख आज एहिजा दे रहल बानी अउर हमरा के गरियावे वाला लोगन से पूछे के चाहत बानी की ऊ लोग कवना स्कूल से भोजपुरी के पढ़ाई कइले बा कि ओकरा नीमनों बात बेजाएं लाग रहल बा...
'इंटरनेटिया लोगन के मिलन आ अंजोरिया के अंजोर'
जब रउआ ओइसन दोस्त से मिले जाए के होखे, जेकरा से रउआ कबो ना मिलल होखीं. बातचीत भइल होखे, उहो फोन से, विचार के आदान-प्रदान भइल होखे बाकिर इंटरनेट के माध्यम से. अइसे में मन में कइसन-कइसन सवाल उठ सकेला. अपना ओह दोस्त के बारे में जे दूर आ बहुत दूर बा.
हमरो मन एह तरह के दोस्तन से मिले खातिर बेचैन रहे. बात पिछला 17 तारीख के हवे. जइसे कि रउआ लोगन के मालुमे होई कि जय भोजपुरिया डॉट कॉम (भोजपुरी के एगो सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट) आपन स्थापना के पहिला वर्षगाठ मनावे खातिर इंटरनेटिया मित्रन के दिल्ली के राजेन्द्र भवन में बोलवले रहे.
तीन बजे से भोजपुरिया लोग राजेन्द्र भवन के लगे मंडराए लागल रहन. मजा त तब आइल जब दिल्ली जइसन अजनबी शहर में दूर-दूर से आइल लोग आपन चिन्हा-परची के लोगन के ढ़ूंढे के कोशिश करत रहे. आंखन में एगो ललक रहे, ओह मित्र से मिले के जेकरा से ऊ पिछला कई साल से इंटरनेट के माध्यम से बतियावत आइल रहे. गजब के माहौल रहे. हालांकि एह मिलन समारोह में मुश्किल के 150 से 200 लोग पहुंचल रहे, बाकिर भोजपुरी के प्रति ई ओह लोगन के दिवानगिए रहे कि केहू कोलकाता से आइल रहे त केहू अंबाला से, त केहू पटना से. एह मिलन समारोह के खास बात ई लउकल कि एह आयोजन में केहू खास आदमी के ना बोलावल गइल रहे. बिना जादा तड़क-भड़क के साधारण रूप में लिट्टी-चोखा खिला के ई कार्यक्रम खतम भइल. इंटरनेटिया मित्रन खातिर ई एगो अजब प्रेम के गजब कहानी जइसन अनुभव रहे.
भोजपुरी के एह कार्यक्रम में हम स्पेस के एगो कार्यक्रम में भाग लेहला के बाद पहुंचल रहीं. स्पेस श्रेष्ठता दिवस के अवसर प आपन सदस्य लोगन के आमंत्रित कइले रहे. एह मौका प जानल-मानल साहित्यकार प्रयाग शुक्ल जी से संवाद करे के मौका मिलल. प्रयाग जी आपन जिनगी में भोगल सांच के आधार प के एगो सूत्र वाक्य कहनी कि, प्रेम से बढ़ के एह दुनिया में कुछो नइखे. जब हम भोजपुरी के कार्यक्रम से बहरी निकलनी त हमरा मन में आइल कि प्रयाग जी एकदम सही कहत रहीं कि प्रेम से बढ़ के कुछो नइखे. ई प्रेम आ स्नेहे नू हवे कि कहां-कहां से आपन इंटरनेटिया मित्रन से मिले खातिर लोग दिल्ली पहुंचल बा.
एही बीच भोजपुरी खातिर एगो अउर उपलब्धी भरल दिन 19 जुलाई के आइल, जब अंजोरिया डॉट कॉम आपन सात साल के सफर के पूरा क के आठवां साल में प्रवेश कइलस. अंजोरिया डॉट कॉम के संपादक ओपी सिंह आपन संपादकीय टिप्पणी में लिखलन कि, एकर शुरुआत जब भइल रहे तब दू तीन गो साइट अंगरेजी में भोजपुरी प जरुर रहे बाकिर फान्ट के लफड़ा के चलते केहू भोजपुरी में साइट चलावे के ना सोचले रहे. अंजोरिया ओह दौर से गुजरल फेर जब यूटीएफ फान्ट सुलभ हो गइल तब एकरा के अपनावे में तनिको देरी ना लगावल गइल. अब त पूरा दुनिया के हर कम्प्यूटर प देवनागरी बा, दुनिया के हर भाषा में साइट उपलब्ध बा, बाकिर पहिलका होखे के उल्लास आ अनुभूति कुछ दोसरे होखेला. कबो केहू कवनो पुरस्कारो से ना नवाजल अंजोरिया के! वइसहूं भोजपुरी में दोसरा के पुरस्कार बड़ा बेमन से दीहल जाला. एक बात के अरमान जरूर रहल कि भोजपुरी खातिर काम करे वाला लोग एकरा के एगो पहचान जरुर देव, एकरा के आपने समझो.
ओपी जी अंजोरिया के आज ले कवनो पुरस्कार ना मिलल त का भइल! अंजोरिया के देश-दुनिया के भोजपुरियन के प्यार आ स्नेह त मिलते बा. ओइसहूं नीमन काम करे वालन के हमनी के समाज देर से याद करे ला. बाकिर इहो सांच बा कि नीमन काम करे वाला लोगन के समाज देर-सबेर ओकर सम्मान जरूर देला. एह से अंजोरिया के भोजपुरिया लोगन खातिर आपन मंच एही तरह से खोल के राखे के चाहीं. पुरस्कार के चरचा से हमरा याद आइल कि जब हम हाले में इंदू शर्मा पुरस्कार से नवाजल गइल वरिष्ठ साहित्यकार हृषीकेश सुलभ जी के उहां के पुरस्कार मिलला प आपन खुशी जाहिर करत बधाई देनी त उहां के जवाब रहे कि, रउआ लोगन के खुशिए हमार पुरस्कार बा. हृषीकेश सुलभ जी के उहां के कथा संग्रह वसंत के हत्यारे खातिर बरिस 2010 के इंदु शर्मा कथा सम्मान से सम्मानित कइल गइल. उहां के ई सम्मान लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस में 08 जुलाई के आयोजित समारोह में दीहल गइल. 15 फरवरी 1955 के बिहार के सिवान जिला में जन्मल कथाकार, नाटककार, रंग-समीक्षक हृषीकेश सुलभ जी पिछला तीन दशकन से कथा-लेखन, नाट्य-लेखन, रंगकर्म के साथे-साथे सांस्कृतिक आन्दोलनो में सक्रिय भागीदारी निभवले बानी.
अंत में इहे कहे के चाहत बानी कि भोजपुरिया लोग आपस में प्यार के गंगा में नहात-धोवात रहे आ भोजपुरी माटी के एही तरह नाम रौशन करत रहे.
राउर
आशुतोष कुमार सिंह
नोट-बोल्ड कइल गइल पंक्तियन प जय भोजपुरिया डॉट कॉम के आपत्ति बा. एह लोगन से त हम इहे कहे के चाहब कि भाई लोग अगर रउआ लोगन के भोजपुरी से तनको मोह बा त भोजपुरिया लोगन के गुमराह कइल छोड़ दीं लोग, ना त इहे भोजपुरिया लोग जवन एह बेरा रउआ लोगन के बरियार पक्ष बाड़ें, ऊ कमजोर पक्ष बन जइहें.
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