सोमवार, 27 सितम्बर 2010

कब ले भोजपुरियन से होत रही दगाबाजी

भोजपुरी के संबंध में एगो धारणा बन गइल बा कि ई एगो मीठ भाषा ह आ साथहीं भोजपुरिया लोग मन के मुलायम होला. हालांकि एह धारणा में बहुत हद तक सांचो बा. अउर एही के वजह से जहवां भोजपुरिया समाज दुनिया के कवनो संस्कृति के साथे तालमेल बइठावे में सफल हो जाला ओहिजे ऊ अपने गांव-घर में अपने लोग से लगातार ठगल जात रहल बा. बिहार आ उत्तरप्रदेश के ऊ इलाका जहवां भोजपुरी के मीठास लोग के अपना मोहपाश में बान्ह लेला, ऊ आज वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के हाथों दमित हो रहल बा. एकर असर पूर्वांचल के बिहार के अंतर्गत पड़े वाला भोजपुरिया क्षेत्र बा. हथुआ के हरहू के भक्ति से जवन भाव निकलल ओकरा से पुरा दुनिया भावविभोर हो गइल. बाकिर आज हथुआ हाथे भर के हो के रह गइल बा. चाहे शिक्षा के बात होखे त, संस्कृति के बात होखे त, चाहे राजनीति के बात, हर क्षेत्र में भोजपुरिया समुदाय आपन विजय पताखा लहरवले बा आ ओही पताखा के शिखर जइसन आपन उमेद के बरकरार राखे खातिर हमेशा से संघर्षरत रहल बा.
ई क्षेत्र देश आ प्रदेश के कइगो होनहार राजनीतिक चेहरा देलस, जवना प कबो पूरा देश के राजनीति केंद्रीत रहे. एकरा बादो एह क्षेत्र में राजनीतिक जागरुकता कबहूं हिलोर ना मरलस. भोजपुरिया माटी के जहवां राजेंद्र बाबू, महामाया प्रसाद प गर्व बा, ओहिजे उनका मीरा कुमार, लालू प्रसाद यादव, राजीव प्रताप रुढ़ी, रविशंकर प्रसाद आ राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उमेद. ऊ माटी आजो आपन दिन बहूरे के राह देखत बिया. हालांकि जब भाजपा के सहयोग से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनले आ देखते-देखत जब इनकर छवि सुशासन बाबू के भइल त पूरा बिहार के साथे-साथे भोजपुरिया क्षेत्र के लोगन के आंख में एगो सुखद सपना हिलोर मारे लागल. उमेद के किरन लोग के मन में अंजोरिया क देलस. बाकिर साढ़े चार साल बीतला के बाद लागत बा कि ई अंजोरिया बबुआ के चंदा मामा के देखा क कवर खिआवे जइसन होके रह गइल बा.
पिछला कुछ महीना पहिले नीतीश कुमार आपन उपलब्धि गिनावे खातिर आ राज्य में सुशासन स्थापित हो गइल बा ई बतावे खातिर पूरा बिहार के दौरा कइलें आ एह दौरा में उनका के भोजपुरिया क्षेत्र जवना तरह से गला से लगवलस, ओकरा से नीतीश कुमार अभिभूत होके भोजपुरिया क्षेत्र के विकास खातिर कइगो वादा कइलन आ अबतक एह क्षेत्र के पिछड़ल रहे खातिर राजनीतिक तीर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद प चलवलन. कुल मिलाजूला के नीतीश कुमारो उहे करत बाड़न जवन आज तक बिहार के पहिले के नेतृत्व कइलस.
ओइसे त बिहार के राजनीति बाहूबलियन के जागीर रहल बा अउर जातिवाद के रखैल. आजो एह अपवाद से किनारा नइखे कइल जा सकत बावजूद एकरा कि राज्य के अधिकांश बाहूबली सलाखन के पाछे चल गइल बाड़न. बाकिर जातिवाद सूरसा जइसन मुंह अबहियों बइले बा. विकास के नारा अभी ले अखबार के पन्ने प लउकत आइल बा, भोजपुरिया क्षेत्र एह विकास से कोसो दूर बा. राज्य के दोसर हिस्सा जइसन एहू हिस्सा के हर परिवार के एगो ना एगो सदस्य राज्य के बहरी जाके आपन रोटी के जोगाड़ में लागल बा. अबहीं ले अइसन कवनो समूचित व्यवस्था ना भइल जवना से कि एहिजा के लोग अपना घरे-दुआरे रहके आपन बाल-बच्चा के चेहरा प खुशी के चमक देख सको.

भोजपुरिया क्षेत्र के आबादी पूरा राज्य के आबादी के लगभग 30 प्रतिशत बा. तबो हमनी के अबहीं ले आपन बुनियादी जरूरत के पूरा करे खातिर राजनीतिक नेतृत्व प दबाव डाले में विफल रहल बानी जा. हमनी के हाथ में एतना ताकत बा कि राज्य के नेतृत्व के दिशा तय क सकत बानी जा. आजो हमनी के आपन भाषा, संस्कृति, तीज-त्योहार के संगे-संगे ना खाली देशे में बलुक पूरा दुनिया में आपन सशक्त उपस्थिति दर्ज करावेनी जा, बाकिर अपने घर में कमजोर बनल रहे खातिर अभिशप्त बानी जा. एकर कारण हमनी के नीमन से जानत बानी.
अब समय आ गइल बा कि हमनी के आपन साख आ आपन हित के सुरक्षित राखे खातिर जागी जा. राज्य में चुनाव होखे वाला बा, फेर खादीधारी नेता हमनी के दुआर प हाथ जोड़ले अउर दांत देखावत लउकीहें. हमनी के चापलूसी क के वोट हथिअइहें. बाकिर एह चुनाव में हमनी के प्रण लेवे के होई कि पिछला बेर जे विधायक रहल, उनका से रिपोर्ट कार्ड मांगल जाव आ नया उम्मीदवारन से क्षेत्र के विकास खातिर उनकर घोषणा के शपथ-पत्र मांगल जाव. अउर जे हमनी के एह पैमाना प खरा ना उतरे ओकर बहिष्कार कइल जाव. इहे अब एगो उपाय रह गइल बा हमनी के अपना भोजपुरियां क्षेत्र के फीजा में मीठास भरे आ खुशी के मोजराए खातिर अब एगो कठोर फैसला करे के पड़ीं. तबे राजेंद्र बाबू आ माहामाया प्रसाद के सपना के भोजपुरिया क्षेत्र में पल्लवित क पाइब जा.

राउर
- आशुतोष कुमार सिंह

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