शुक्रवार, 12 नवम्बर 2010

भोजपुरी सिनेमा पर अब तक का सबसे बड़ा जन सर्वेक्षण

द संडे इंडियन और आईसीएमआर ने कराया सर्वेक्षण



भोजपुरी सिनेमा 50 सालों का सफर पूरा कर चुका है. इस लंबी पारी में अब तक लगभग 475 फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैं. बदलते वक्त के साथ-साथ भोजपुरी फिल्मों का मिजाज भी लगातार बदल रहा है. यह बदलाव कितना सकारात्मक है और कितना नकारात्मक और इसमें अपने-अपने क्षेत्र में किन लोगों ने सबसे श्रेष्ठ काम किया है. यह जानने के लिए द संडे इंडियन और इंडियन कॉउसिल ऑफ मार्केट रिसर्च (आईसीएमआर) ने राष्ट्रीय स्तर पर 3000 लोगों की राय जानने की कोशिश की. यह सर्वेक्षण मार्च 2009 से मार्च 2010 के बीच प्रदर्शित भोजपुरी फिल्मों के आधार पर किया गया.



मुख्य बातें एक नजर में...

आम लोगों की राय में दिनेश लाल यादव सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, समीक्षकों की नजर में रवि किशन न.1 की पदवी पर हैं.

अगर बात की जाए अभिनेत्रियों कि तो पाखी हेगड़े ने रानी चटर्जी को 1.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ दूसरे पायदान पर पिछे छोड़ दिया, पाखी को 43.75 फीसदी तो रानी को 42.5 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया.

मनोज तिवारी समीक्षकों की नजर में दूसरे पायदान पर तो आम लोगों ने उन्हें अपने दिल में चौथा स्थान दिया.

समीक्षकों ने रिंकू घोष को सफलता के पायदान पर सबसे आगे रखा तो पाखी को सबसे नीचले पायदान पर, इस दौड़ में जहां रानी चटर्जी को तीसरा स्थान मिला तो वहीं मोनालिसा को दूसरा स्थान.

आम लोगों की नजर में हॉट मोनालिसा हुई कोल्ड, पहुंची चौथे स्थान पर

आम लोगों ने गायक से अभिनेता बने पवन सिंह को सर आंखों पर बैठाया तो समीक्षकों ने पवन सिंह चौथे पायदान पर रखा.

गायकी में उदित नारायण और कल्पना न.1 पर पहुंचे
तो इंदू सोनाली और पवन सिंह ने दूसरे स्थान पर अपना नाम दर्ज करवाया.

नवोदित अभिनेता और अभिनेत्री की श्रेणी में प्रवेश लाल यादव और सुभी शर्मा न.1 चुने गए.

आइटम गर्ल संभावना का जादू एक बार फिर चला आम लोगों ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ का ताज पहनाया तो सीमा सिंह को दूसरे व कविता सिंह को तीसरा स्थान दिया.

निर्देशन के क्षेत्र में असलम शेख को लोगों ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का दर्जा दिया तो दूसरी ओर समीक्षकों ने राजकुमार आर पांडेय को बेहतर निर्देशक बताया.

संगीत निर्देशन में लोगों ने धनंजय मिश्रा को सिरमौर बताया
तो दूसरी ओर समीक्षकों ने मधुकर आनंद को न.1 का हकदार बताया

विनय बिहारी बने न. वन गीतकार

संतोष मिश्रा पटकथा लेखन की श्रेणी में, कुणाल सिंह चरित्र अभिनेता की श्रेणी में, कानू मुखर्जी सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशक की श्रेणी में, अवधेश मिश्रा सर्वेश्रेष्ठ खलनायक और कला निर्देशन के क्षेत्र में अंजनी तिवारी, एक्शन डायरेक्टर की श्रेणी में शकील ने अपना ना दर्ज करवाया तो मनोज टाइगर सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार के रूप में पहले पायदन पर ऊभर कर आए.

मार्च 2009 -10 की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की बात की जाए तो भूमिपुत्र, दीवाना, तोहार नइखे कवनो जोड़ तू बेजोड़ बाड़ू हो, उमरिया कइलीं तोहरे नाम और परिवार अव्वल रही वहीं दूसरी ओर निरहुआ के प्रेम के रोग भइल, हो गइनी दीवाना तोहरे प्यार में, रंगबाज दरोग, कानून हमरा मुट्ठी में जैसी फिल्मों ने भी खूब चर्चा बटोरी.

48 फीसदी लोगों ने यह माना कि भोजपुरी फिल्में अश्लीलता के मामले में हिंदी फिल्मों से कम अश्लील है.

45 फीसदी लोग भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रियता की मुख्य वजह गीत-संगीत को मानते हैं.

भोजपुरी फिल्मों में भोजपुरिया संस्कृति की झलक अब नहीं मिल रही है, ऐसा मानना है 48 फीसदी लोगों का, जबकि28 फीसदी लोग यह मानते हैं कि जितनी होनी चाहिए उससे थोड़ा ही कम है. 43 फीसदी लोग यह भी मानते हैं कि दूसरी क्षेत्रीय फिल्मों के मुकाबले भोजपुरी फिल्में बेहतर नहीं हैं, जबकि 42 फीसदी लोग इसे बेहतर मानते है.


पूरी जानकारी के लिए द संडे इंडियन भोजपुरी का फिल्म स्पेशल अंक और साथ ही हिंदी अंक जरूर पढ़ें.
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